नमस्कार,
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम-आप बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. हम अपने समाज में हो रहे सामजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक बदलावों से या तो अनजान रहते हैं या जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश करते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमारे परिवार, समाज और देश के लिए घातक साबित हो सकती है. अपने इस चिट्ठे (Blog) "समाज की बात - Samaj Ki Baat" में इन्हीं मुद्दों से सम्बंधित विषयों का संकलन करने का प्रयास मैंने किया है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत रहेगा...कृष्णधर शर्मा - 9479265757

सोमवार, 29 अगस्त 2011

सत्य का आग्रह

काशी में विद्याध्ययन कर रहा एक छात्र एक दिन एक दुकान पर ताला खरीदने गया. एक  ताले की कीमत पूछने पर दुकानदार ने बताया इसकी कीमत दस आने है. लड़के ने देखा यह ताला तो बहुत हल्का है, उसने दुकानदार से कहा 'श्रीमान! सत्य कहूं तो मुझे इस  ताले की कीमत तो तीन आने ही लगती है पर आप कह रहे हैं तो आपकी बात ही सच माननी पड़ेगी'. यह कहकर छात्र ने बेमन से  दस आने दुकानदार को चुकाए और ताला लेकर चल दिया.
         लड़का प्रतिदिन उसी दुकान के सामने से होकर ही घूमने जाता था. एक दिन दुकानदार ने स्वयं   उसके सामने आकर कहा-"बेटा तुम्हारे सत्य के आग्रह के सामने मई झुक गया हूँ". ताला सचमुच ही  तीन आने का था, यह लो अपने बाकी के सात आने, कहकर दुकानदार छात्र को सात आने लौटा कर चल दिया और फिर जीवन में किसी को भी ना ठगने की प्रतिज्ञा कर ली.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें