रविवार, 15 मार्च 2015

अकिंचन का आतिथ्य


घर के सबसे अच्छे बरतन
सबसे सुथरी चादर
सबसे बढ़िया बिस्तर
और अपना निर्मल हृदय
परोस देता है अकिंचन
अतिथि के आतिथ्य में
नास्ते में नमकीन,बिस्कुट,चाय
और खाने में पूड़ी,सब्जी,सेवई
या जो भी बन सके सबसे अच्छा
वह सब खिलाता है
अपने अतिथि को अकिंचन
परवाह नहीं करता अकिंचन जरा भी
कि कितनी उधारी हो गई है
पड़ोसियों के यहाँ
या फिर नुक्कड़ की दुकान पर
वह तो बस चाहता है कि
खुश होकर, तृप्त होकर
अपने घर वापस जाये उसका अतिथि
भले ही इसके एवज में
रह जाए वह सदा ही अकिंचन!

                 (कृष्ण धर शर्मा, २०१५)

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