शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

मुझे तीन दो शब्द

 

मुझे तीन दो शब्द कि मैं कविता कह पाऊँ।

एक शब्द वह जो न कभी जिह्वा पर लाऊँ,

 

और दूसरा : जिसे कह सकूँ

किंतु दर्द मेरे से जो ओछा पड़ता हो।

 

और तीसरा : खरा धातु, पर जिसको पाकर पूछूँ—

क्या न बिना इसके भी काम चलेगा? और मौन रह जाऊँ।

 

मुझे तीन दो शब्द कि मैं कविता कह पाऊँ।

 

अज्ञेय

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