शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

दुख ने मुझको जब-जब तोड़ा

 

दुख ने मुझको

जब-जब तोड़ा,

 

मैंने

अपने टूटेपन को

 

कविता की ममता से जोड़ा,

जहाँ गिरा मैं,

 

कविताओं ने मुझे उठाया,

हम दोनों ने

 

वहाँ प्रात का सूर्य उगाया।

 

केदारनाथ अग्रवाल

#समाजकीबात #samajkibaat #Sahitya #साहित्य समाजकीबात samajkibaat Sahitya साहित्य

#कृष्णधरशर्मा #Krishnadharsharma कृष्णधरशर्मा Krishnadharsharma 

 

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें