शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

अमृता प्रीतम - मन योगी तन भस्म भया

 

मन योगी तन भस्म भया

तू कैसो हर्फ़ कमाया


अज़ल के योगी ने फूँक जो मारी

इश्क़ का हर्फ़ अलाया...

 

धूनी तपती मेरे मौला वाली

मस्तक नाद सुनाई दे

 

अंतर में एक दीया जला

आस्मान तक रोशनाई दे

 

कैसो रमण कियो रे जोगी!

किछु न रहियो पराया

 

मन योगी तन भस्म भया

तू ऐसी हर्फ़ कमाया...

 

हिंदी साहित्य Hindi sahitya Literature  

समाज की बात samajkibaat

कृष्णधरशर्मा Krishnadharsharma

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