सामाजिक मुद्दों से सम्बंधित लेखों और विचारों का संग्रह

नमस्कार,

आज की इस व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. अपने समाज में हो रहे बदलावों से या तो अनभिज्ञ रहते हैं या तो जान-बूझकर भी अनजान बन जाते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमें अंतर्मुखी और स्वार्थी बनाती है, जो कि इस समाज के लिए हितकारी नहीं है. यहाँ पर कुछ ऐसे ही मुद्दों से सम्बंधित लेख और विचारों का संग्रह करने का मैंने प्रयास किया है. (कृष्णधर शर्मा- 9479265757) facebook.com/kdsharmambbs

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

चाहे तुम घर पहुंचो या नहीं!

नीता: तुम्हारे पति हमेशा ही घर समय पर कैसे पहुंचते हैं?
मीता: मैंने एक आसान सा नियम बनाया हुआ है...
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'रोमांस ठीक 9 बजे शुरू हो जाएगा, चाहे तुम घर पहुंचो या नहीं!'

रविवार, 21 फ़रवरी 2010

स्लाइड में अपनी पे स्लिप लगा दी

बॉस (बंता से): अपनी प्रेजेंटेशन की शुरुआत एक जोक के साथ करना।
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बंता ने प्रेजेंटेशन की पहली स्लाइड में अपनी पे स्लिप लगा दी।