सामाजिक मुद्दों से सम्बंधित लेखों और विचारों का संग्रह

नमस्कार,

आज की इस व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. अपने समाज में हो रहे बदलावों से या तो अनभिज्ञ रहते हैं या तो जान-बूझकर भी अनजान बन जाते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमें अंतर्मुखी और स्वार्थी बनाती है, जो कि इस समाज के लिए हितकारी नहीं है. यहाँ पर कुछ ऐसे ही मुद्दों से सम्बंधित लेख और विचारों का संग्रह करने का मैंने प्रयास किया है. (कृष्णधर शर्मा- 9479265757) facebook.com/kdsharmambbs

रविवार, 11 अप्रैल 2010

इतनी क्यों पी रखी है?

नशे में धुत संता को सड़क पर लड़खड़ाते देख पुलिसवाले ने पूछा: इतनी क्यों पी रखी है?
संता: मजबूरी थी साहब।

पुलिसवाला: ऐसी क्या मजबूरी थी?
संता: बोतल का ढक्कन गुम हो गया था!