नमस्कार,
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम-आप बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. हम अपने समाज में हो रहे सामजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक बदलावों से या तो अनजान रहते हैं या जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश करते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमारे परिवार, समाज और देश के लिए घातक साबित हो सकती है. अपने इस चिट्ठे (Blog) "समाज की बात - Samaj Ki Baat" में इन्हीं मुद्दों से सम्बंधित विषयों का संकलन करने का प्रयास मैंने किया है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत रहेगा...कृष्णधर शर्मा - 9479265757

गुरुवार, 25 जून 2026

रात 9 बजे के बाद खाते हैं खाना तो फौरन बदल लें ये आदत, वरना आपको चुकानी होगी भारी कीमत


 इस मॉर्डन लाइफस्टाइल में देर रात खाना कई लोगों की एक आम आदत बन गई है, फिर वो चाहे बिजी वर्क शेड्यूल की वजह से हो कोई सोशल गैदरिंग हो या फिर लेट नाइट क्रेविंग्स। हालाँकि, हेल्थ एक्सपर्ट ने हमेशा से ही देर रात में खाना खाने को लेकर चेतावनी दी है कि रात का खाना देर से खाना, खासतौर पर रात 9 बजे के बाद पूरे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं देर रात खाना खाने से होने वाले नुकसान के बारे में...

 

9 बजे के बाद खाना खाने के तुरंत बाद सोने से पेट भारी लगता है और नींद में बाधा आती है। साथ ही, एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है, जिससे सीने में जलन और बेचैनी महसूस होती है। अच्छी नींद के लिए खाने और सोने के बीच कम से कम 2-3 घंटे का अंतर रखना चाहिए।

वजन बढ़ने का खतरा बढ़ना

देर रात डिनर करने वाले लोगों में मोटापे का खतरा ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रात में कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और शरीर इसे स्टोर कर लेता है। इसके अलावा, देर से खाने के बाद सोने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ सकता है, जो डायबिटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का कारण बन सकता है।

हार्ट डिजीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा

देर रात खाना खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है। ये दोनों ही दिल की बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

हार्मोनल इंबैलेंस

शरीर का सार्केडियन रिदम हार्मोन्स को कंट्रोल करता है। देर रात खाने से कोर्टिसोल और इंसुलिन का लेवल इंबैलेंस हो सकता है, जिससे थकान, मूड स्विंग और लंबे समय में हार्मोनल डिसऑर्डर हो सकते हैं।

खराब पाचन और सूजन

हमारे शरीर का हर फंक्शन सार्केडियन रिदम के मुताबिक काम करती है। जब हम देर रात को खाना खाते हैं, तो यह रिदम बिगड़ने लगती है। दरअसल, रात में मेटाबॉलिज्म उतना तेज नहीं होता, जितना दिन के समय होता है। इसलिए जब हम देर रात खाना खाते हैं, तो खाना पचाने में हमें ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे अपच, गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।

रात में खाना खाने का सही समय क्या है?

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रात के खाने के लिए सबसे अच्छा समय शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच है, जिससे सोने से पहले शरीर को भोजन पचाने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। यह मेटाबॉलिज्म को हेल्दी बनाए रखने, पाचन में सुधार करने और लंबे समय में होने वाली बीमारियों को रोकने में मदद करता है।

 

 साभार-नईदुनिया

समाज की बात samajkibaat

कृष्णधरशर्मा Krishnadharsharma

ईयरबड्स की लत से बढ़ रहा बहरेपन का खतरा, घर-ऑफिस-ट्रेवल... हर जगह है यह खतरनाक आदत

 

वर्तमान में बाजार में ईयरबड्स की कीमतें ₹500 से शुरू होकर कई हजार रुपये तक जाती हैं। ग्वालियर के राजीव प्लाजा में मोबाइल विक्रेता बताते हैं कि दो साल पहले तक इतनी मांग नहीं थी, लेकिन अब हर दो से चार घंटे में एक ईयरबड्स की बिक्री हो रही है। खासकर युवा वर्ग में यह एक आदत बन गई है।

आज के दौर में ईयरबड्स या ईयरफोन हमारी रोजमर्रा की जिदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। मोबाइल फोन के साथ-साथ अब ईयरबड्स भी एक जरूरत बन गए हैं। चाहे हम ऑफिस में हों, यात्रा कर रहे हों या घर पर आराम कर रहे हों। लेकिन जिस आराम और स्टाइल के लिए हम ईयरबड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, वही धीरे-धीरे हमारी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा रहा है।

ईयरबड्स से सुनने की क्षमता पर प्रभाव

ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुनील शर्मा बताते हैं कि ईयरबड्स का लंबे समय तक और तेज आवाज में उपयोग करना सुनने की शक्ति को कम कर सकता है। इससे कान के भीतर की संवेदनशील कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। यह नुकसान धीरे-धीरे होता है, और कई बार तब तक पता नहीं चलता जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती।

कान में दर्द या संक्रमण की समस्या

ईयरबड्स का ज्यादा उपयोग सिर्फ सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि कान में दर्द, संक्रमण, वैक्स जमाव और खुजली जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है। अगर ईयरबड्स को समय-समय पर साफ नहीं किया जाए, तो उनमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो कानों में गंभीर संक्रमण फैला सकते हैं।

10-12 घंटे तक ईयरबड्स का इस्तेमाल

काल सेंटर या ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारी जो लगातार 10-12 घंटे तक ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है। यह आदत सिर्फ उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है बल्कि दीर्घकालिक श्रवण समस्याएं (long-term hearing problems) भी पैदा कर सकती है।

दूसरों के ईयरबड्स का उपयोग करने से बचें

दूसरों के ईयरबड्स का उपयोग करना पूरी तरह से टालना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ईयरबड्स कान के भीतरी हिस्से के संपर्क में रहते हैं, और दूसरों का इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकते हैं।

युवाओं में ईयरबड्स लगाने का क्रेज

वर्तमान में बाजार में ईयरबड्स की कीमतें ₹500 से शुरू होकर कई हजार रुपये तक जाती हैं। ग्वालियर के राजीव प्लाजा में मोबाइल विक्रेता बताते हैं कि दो साल पहले तक इतनी मांग नहीं थी, लेकिन अब हर दो से चार घंटे में एक ईयरबड्स की बिक्री हो रही है। खासकर युवा वर्ग में यह एक आदत बन गई है।

ईएनटी एक्सपर्ट की राय

ईएनटी विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर आप रोजाना कई घंटे ईयरबड्स का उपयोग कर रहे हैं, तो अपने कानों की जांच कराना आवश्यक है। बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक ईयरबड्स का प्रयोग आपकी श्रवण शक्ति को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।

साभार-नईदुनिया

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कृष्णधरशर्मा Krishnadharsharma