सामाजिक मुद्दों से सम्बंधित लेखों और विचारों का संग्रह

नमस्कार,

आज की इस व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. अपने समाज में हो रहे बदलावों से या तो अनभिज्ञ रहते हैं या तो जान-बूझकर भी अनजान बन जाते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमें अंतर्मुखी और स्वार्थी बनाती है, जो कि इस समाज के लिए हितकारी नहीं है. यहाँ पर कुछ ऐसे ही मुद्दों से सम्बंधित लेख और विचारों का संग्रह करने का मैंने प्रयास किया है. (कृष्णधर शर्मा- 9479265757) facebook.com/kdsharmambbs

रविवार, 10 मई 2015

सम्प्रेषण


बिन बोले भी हो जाती हैं
बहुत सारी बातें
बोलकर करना जो शायद
लगता है बहुत ही कठिन
बातें आँखों से भी
चेहरे के हाव-भाव से भी
और कंधे उचका कर भी
कह दी जाती हैं
कई सारी ऐसी बातें
जो नहीं कही जा सकती है जुबान से
चाहे वह माँ की नाराजगी हो
बच्चे का गुस्से से मुह फेर लेना
प्रेमिका का गाल फुला लेना
प्रेमी का आँखों-आँखों में मनाना
आपसी सम्प्रेषण उतना ही प्रभावी है
आँखों से, शरीर के बाकी अंगों से
उतना ही जितना कि जुबान से

                    कृष्ण धर शर्मा २०१५