नमस्कार,
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम-आप बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. हम अपने समाज में हो रहे सामजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक बदलावों से या तो अनजान रहते हैं या जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश करते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमारे परिवार, समाज और देश के लिए घातक साबित हो सकती है. अपने इस चिट्ठे (Blog) "समाज की बात - Samaj Ki Baat" में इन्हीं मुद्दों से सम्बंधित विषयों का संकलन करने का प्रयास मैंने किया है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत रहेगा...कृष्णधर शर्मा - 9479265757

शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

रात का फूल

 

एक फूल

रात की किसी अंधी गाँठ में

घाव की तरह खुला है

किसी बंजर प्रदेश में

और उसके रंग में जादू है

टूटती हुई गृहस्थी,

छूटती हुई नौकरी, अपमान और असुरक्षा

के तनाव में टूटते हुए मस्तिष्क से

निकली है कोई कविता

जिसके क्रोध और दुख और घृणा में

कला है

ख़ाली बरतनों, दवाइयों की शीशियों

और मृत्यु की गहरी गंध से भरे

कमरे में

हँसता है वह ढाई साल का बच्चा

और उसके दूधिया दाँतों में

ग़ज़ब की चमक है!

 

उदय प्रकाश

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