नमस्कार,
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम-आप बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. हम अपने समाज में हो रहे सामजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक बदलावों से या तो अनजान रहते हैं या जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश करते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमारे परिवार, समाज और देश के लिए घातक साबित हो सकती है. अपने इस चिट्ठे (Blog) "समाज की बात - Samaj Ki Baat" में इन्हीं मुद्दों से सम्बंधित विषयों का संकलन करने का प्रयास मैंने किया है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत रहेगा...कृष्णधर शर्मा - 9479265757

शुक्रवार, 6 मार्च 2026

मन योगी तन भस्म भया

 

मन योगी तन भस्म भया

तू कैसो हर्फ़ कमाया

 

अज़ल के योगी ने फूँक जो मारी

इश्क़ का हर्फ़ अलाया...

 

धूनी तपती मेरे मौला वाली

मस्तक नाद सुनाई दे

 

अंतर में एक दीया जला

आस्मान तक रोशनाई दे

 

कैसो रमण कियो रे जोगी!

किछु न रहियो पराया

 

मन योगी तन भस्म भया

तू ऐसी हर्फ़ कमाया...

 

अमृता प्रीतम

 #समाजकीबात #samajkibaat #Sahitya #साहित्य समाजकीबात samajkibaat Sahitya साहित्य

#कृष्णधरशर्मा #Krishnadharsharma कृष्णधरशर्मा Krishnadharsharma 

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें