नमस्कार,
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम-आप बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. हम अपने समाज में हो रहे सामजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक बदलावों से या तो अनजान रहते हैं या जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश करते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमारे परिवार, समाज और देश के लिए घातक साबित हो सकती है. अपने इस चिट्ठे (Blog) "समाज की बात - Samaj Ki Baat" में इन्हीं मुद्दों से सम्बंधित विषयों का संकलन करने का प्रयास मैंने किया है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत रहेगा...कृष्णधर शर्मा - 9479265757

मंगलवार, 19 मार्च 2019

भारत में प्रयोग होने वाले खेत नापने के फार्मूले

नापने का पैमाना

1 Gaz (एक गज)
= 1 Yard (एक यार्ड)
= 0.91 Meters (0.91 
मीटर)
= 36 Inch (36 
इंच)
1 Hath (एक हाथ)
=½ Gaz (आधा गज)
= 18 Inch (18 
इंच)
1Gattha (एक गट्ठा)
= 5 ½ Hath (साढे पांच हाथ)
= 2.75 Gaz (
पौने तीन गज)
= 99 Inch (99 
इंच)
1 Jareeb (जरीब)
= 55 Gaz (55 गज)


क्षेत्रफल मापने के मात्रक

1 Unwansi (एक   उनवांसी)
=24.5025 Sq Inch (24.5025 वर्ग   इंच)
1 Kachwansi (एक  कचवांसी)
=20 Unwansi (20 उनवांसी)
1 Biswansi ( एक बिसवांसी)
=20 Kachwansi (20 कचवांसी)
= 1 Sq. Gattha (
एक वर्ग गट्ठा)
= 7.5625 Sq.Yard (7.5625 
वर्ग   गज)
= 9801 Sq Inch (9801 
वर्ग इंच)
1 Bissa (एक बिस्सा)
=20 Biswansi (20 बिस्वांसी)
= 20 Sq.Gattha (20 
वर्ग गट्ठा)
1 Kaccha Bigha (एक कच्चा बीघा)
= 6 2/3 Bissa (6 2/3 बिस्से:)
= 1008 Sq.Yard and 3Sq Feet   (1008 
वर्ग गज और 3वर्गफुट)
= 843 Sq. Meters (843 
वर्ग मीटर)
1 Pucca Bigha (एक पक्काf बीघा)
= 1 sq. Jareeb (एक वर्ग जरीब)
= 3 Kaccha Bigha (
तीन कच्चे   बीघे)
=20 Bissa (20 
बिस्सें)
= 3025 Sq. Yard (3025 
वर्ग गज)
= 2529 Sq. Meters 2529 
वर्ग   मीटर)
= 27225 Sq. Feet (27225 
वर्ग   फुट)
=165x165 Feet
1 Acre (एक एकड)
= 4840 Sq. Yard (4840 वर्ग गज)
= 4046.8 Sq.Meters   (4046.8 
वर्ग   मीटर)
= 43560 Sq. Feet (43560 
वर्ग   फुट)
= 0.4047 Hectare   (0.4047 
हेक्टेयर)
1 Hectare (एक हेक्टेयर)
= 2.4711 Acre (2.4711 एकड)
= 10000 Sq meters ( 10000 
वर्ग   मीटर










भू-मीत (कृष्ण धर शर्मा - Krishnadhar Sharma)
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शनिवार, 16 मार्च 2019

एक चिथड़ा सुख-निर्मल वर्मा

 "क्या तुमने उन्हें देखा है-उन बँगलों को? इसे लुटियेन्स का शहर कहा जाता है, रायसीना के बँगले। वहाँ लम्बे लॉन हैं, झाड़ियों से घिरे हुए, पेड़ों से घिरे हुए। वे जामुन के पेड़ हैं, जो बारिश के दिनों में पकते हैं, टपाटप नीचे गिरते हैं। ज़रा ऊपर देखो, तो बुगुबगोलिया के फूल दिखाई देंगे, लाल और सुर्ख, बँगलों को अपनी लपटों में लपेटे हुए।" (एक चिथड़ा सुख-निर्मल वर्मा)



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सोमवार, 11 मार्च 2019

सेवासदन-प्रेमचन्द

 "वसंत के समीर और ग्रीष्म की लू में कितना अंतर है। एक सुखद और प्राणपोषक, दूसरा अग्निमय और विनाशिनी। प्रेम वसंत-समीर है, द्वेष ग्रीष्म की लू। जिस पुष्प को वसंत-समीर महीनों में खिलाती है, उसे लू का एक झोंका जलाकर राख कर देता है।" "तुम सच कहती हो, बेशक हिंदू जाति अधोगति को पहुंच गई, और अब तक वह कभी की नष्ट हो गई होती, पर हिंदू स्त्रियों ही ने अभी तक उसकी मर्यादा की रक्षा की है। उन्हीं के सत्य और सुकीर्ति ने उसे बचाया है।  केवल हिंदुओं की लाज रखने के लिए लाखों स्त्रियां आग में भस्म हो गई हैं। यही वह विलक्षण भूमि है, जहां स्त्रियां नाना प्रकार के कष्ट भोग कर, अपमान और निरादर सहकर पुरुषों की अमानुषीय क्रूरताओं को चित्त में न लाकर हिंदू जाति का मुख उज्ज्वल करती थीं। यह साधारण स्त्रियों का गुण था और ब्राह्मणियों का तो पूछना ही क्या?" (सेवासदन-प्रेमचन्द)



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शनिवार, 9 मार्च 2019

पुरुष का अधिकार


पुरुष को नहीं है अधिकार, नैतिक रूप से
सबके सामने खुलकर रोने का
वैसे भी, घर में दादी, नानी, माँ सहित
तमाम बडे-बुजुर्गों का कहना यही रहा है
कि, पुरुषों का रोना अपशकुन होता है
या पुरुष भी कभी रोते हैं भला!
इन सब बातों का यह कत्तई मतलब नहीं है
कि, उसके पास आंसुओं की कमी है
या वह कम भावुक है बनिस्बत स्त्री के
इकठ्ठा होते-होते भर चुका होता है
उसके भी आंसुओं का बांध, मगर
वह जानता है कि उसके रोते ही
टूट सकती हैं कई सारी उम्मीदें
धराशायी हो सकते हैं सपनों के महल
जो एक ही रात में नहीं देखे गए हैं
वह नहीं कर पाता है साहस
उन सपनों को तोड़ पाने का
जिन्हें देखने में लगी हैं कई जोड़ी आँखें
और कितनी ही रातें
वह नहीं व्यक्त कर पाता
कभी-कभी अपनी थकन भी
क्योंकि दिनभर काम की
जद्दोजहद के बाद भी, उससे
रहती हैं कई अपेक्षाएं और आशाएं
बहुत ही मुश्किल लगता है उसे
उन्हें नजरंदाज कर पाना
फिर, वह बिखेरता है अपने चेहरे पर
एक बनावटी और सजावटी मुस्कान
ताकि, उसकी थकावट देखकर
थक न जाएं कितनी ही उम्मीदें
           (कृष्णधर शर्मा 05/02/2019)

स्त्री ही ऐसी हो सकती

स्त्री में तुमने क्या देखा!
उसकी सुंदरता के सिवा
क्या देख सके वह कोमल मन
जिससे निकले है यह जीवन
क्या देख सके उसकी मेह्नत
जिससे सजे है तुम्हारा तन-मन
तैरते ही रहे सतहों में तुम 
गहराई में तो न उतर सके
फिर पाओगे कैसे मोती
कैसे संवरेगा तुम्हारा मधुबन
भोर भये से रात गये तक
लडती झंझावातों से
काम में अपने मगन ही रहती
हारती नहीं आघातों से
फिर भी तुम न पहचान सके
तो इसमें उसकी क्या गलती
दो जून की रोटी खाकर वह
वेतन बिन ही खटती रहती
तुम्हें खिलाये पूरा भोजन
जूठन खाकर भी खुश रहती
पुरुष नहीं हो सकता ऐसा
स्त्री ही ऐसी हो सकती...
            (कृष्णधर शर्मा 05/02/2019)
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समाज की बात 

मंगलवार, 5 मार्च 2019

मनुस्मृति-महर्षि मनु

  "उस ब्रह्मा ने जिसको जिस कर्म में लगाया था, वह बार-बार उसी कर्म को करने लगा।  हिंसा, अहिंसा, मृदु, क्रूर, धर्म, अधर्म, सत्य और असत्य की सृष्टि के प्रारम्भ में जो जिस-जिसके लिए बनाया; वह बार-बार उसी को स्वयं ही प्राप्त होने लगा। सतयुग ब्राह्मण, त्रेता क्षत्रिय, द्वापर वैश्य और कलि को शूद्र कहा गया है। ब्राह्मणों से भी विद्वान श्रेष्ठ हैं, विद्वानों में कृतबुद्धि (शास्त्रोक्त कर्तव्य में बुद्धि रखने वाले) श्रेष्ठ हैं, कृतबुद्धियों में अनुष्ठान (शास्त्रोक्त कर्तव्य के अनुसार आचरण करनेवाले) श्रेष्ठ हैं और उनमें ब्रह्मज्ञानी श्रेष्ठतम हैं। वेदों तथा स्मृतियों में कहा गया है कि आचार ही श्रेष्ठ धर्म है। आत्महिताभिलाषी द्विज का इसके पालन में प्रयत्नशील होना चाहिए। आचार भ्रष्ट ब्राह्मण वेद के फल को नहीं पाता है और आचारवान ब्राह्मण सम्पूर्ण फल का भागी होता है।" (मनुस्मृति-महर्षि मनु)



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शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

हिंदी की वर्तनी-संत समीर

 "यह भी आश्चर्य की ही बात है कि अपने ढाई हज़ार चिन्हनुमा अक्षरों के साथ चीनी भाषा निरंतर विकसित हो रही है, जापानी की चित्रात्मक लिपि जापानियों को परेशान नहीं करती, पर हिंदी की वैज्ञानिकता बचाये रखने भर को सिर्फ़ इने-गिने वर्णों-शब्दों का शुद्ध इस्तेमाल भी हमारे मीडिया महारथियों को बोझ लग रहा है। आश्चर्य यह भी है कि ये ही लोग अंग्रेजी में हिज्जे की एकाध गलती से उद्विग्न हो उठते हैं, पर हिंदी में घोर अराजकता भी इन्हें परेशान नहीं करती। टी.वी. चैनलों और अखबारों -पत्रिकाओं से भले तो 'अंतरजाल' (इंटरनेट) के चिट्ठे (ब्लॉग) हैं, जहाँ चिट्ठाकारी कर रहे नवसिखुवे तक टूटी-फूटी और काफ़ी हद तक अराजक किस्म की हिंदी लिखते हुए भी निरंतर भाषा-सुधार का अभियान-सा चलाए हुए हैं और हिंदी के अनुकूल तकनीकी सुधार भी कर रहे हैं। (हिंदी की वर्तनी-संत समीर)



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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

रवा सूजी की बर्फी


रवा यानि सूजी का हलवा, सूजी की खीर तो आपने कई बार बनाई, खाई और खिलाई होगी, पर क्या कभी आपने इसकी बर्फी बनाई है? अगर नहीं तो एक रेसिपी आपके लिए ही है. 
एक नज़र
रेसिपी क्विज़ीन : इंडियन, डिजर्ट
कितने लोगों के लिए : 2 - 4
समय : 15 से 30 मिनट
मील टाइप : वेज
सामग्री
एक कप रवा (सूजी)
आधा कप कद्दूकस किया हुआ नारियल
डेढ़ कप दूध
एक कप चीनी
चुटकीभर इलायची पाउडर
जरूरत के अनुसार घी
बादाम 4-5 (बीच में से कटे हुए)

विधि
- मीडियम आंच में एक पैन में घी गरम करने के लिए रखें.
-
घी के गरम होते ही इसमें रवा डालकर भूनें.
-
सूजी के हल्का भुनते ही नारियल मिलाकर एक मिनट तक और भूनें.
-
अब इसमें दूध मिलाएं और लगातार चलाते रहें जब तक कि रवा पूरा दूध न सोक लें.
-
दूध के पूरी तरह से सूख जाने के बाद चीनी और इलायची पाउडर मिलाएं.
-
लगातार चलाते जरूर रहें. चीनी पिघलकर सूजी के साथ मिक्स होकर इसे और भी ठोस बनाएगी.
-
अंत में एक बार और थोड़ा सा घी डालकर मिक्स करें और आंच बंद कर दें.
-
एक प्लेट पर घी लगाकर पूरे मिश्रण को इस पर फैलाएं.
-
आधे घंटे बाद इसे मनचाहे आकार में काट लें.
-
तैयार है रवा बर्फी. ऊपर से बादाम लगा दें.


  • साभार- पकवानगली 
  • प्रस्तुति- अर्चना शर्मा




स्पंजी मुलायम और रसदार रसगुल्ले


रसगुल्ले खाने में तभी मजेदार लगते हैं जब ये स्पंजी और रसीले हों. अगर आप भी एकदम रुई जैसे मुलायम और रसीले रसगुल्ले बनाना चाहती हैं तो इस रेसिपी से बनाइए एकदम मुलायम और रसदार रसगुल्ले.

सामग्री
1 लीटर काऊ मिल्क
2
टेबलस्पून नींबू का रस
250
ग्राम चीनी
1
लीटर पानी
1
टीस्पून कॉर्नफ्लोर
1
टीस्पून केवड़ा जल
चौड़ी कड़ाही
सूती कपड़ा
छन्नी/ड्रेनर

बनाने की विधि 
- कड़ाही में दूध डालकर मीडियम आंच पर रखें. कड़ाही को ढक दें.
-
जब इसमें उबाल आ जाए मलाई जम जाए तो इसे आंच से उतार लें.
- 1-2
मिनट तक दूध को चलाते हुए ठंडा कर लें. ऐसा करने से छेना सॉफ्ट बनेगा.
-
जब हल्का ठंडा हो जाए तो इसमें नींबू का रस डालकर थोड़ा-सा चलाकर छोड़ दें. ध्यान रखें नींबू का रस डालने के बाद दूध ज्यादा देर तक फेंटना या कड़छी से हिलाना नहीं है. छेना फाड़ने के लिए ज्यादा नींबू का रस भी नहीं डालना चाहिए नहीं तो छेना सक्त बनता है.
-
जब दूध फट जाए और चमकदार थक्के न बन जाए तब तक इसे न हिलाएं.
-
जब दूध के थक्के बढ़िया बन जाए तो इसे कड़छी से चलाकर बढ़िया छेना बना लें.
-
छन्नी के ऊपर कपड़ा रखकर इसमें छेना डालकर छान लें.
-
इसे छेने की पोटली ठंडे पानी में धो लें. ऐसा करने से छेना सॉफ्ट बनेगा और नींबू की खटास निकल जाएगी.
-
पानी से निकालने के बाद छेने की पोटली को दबा-दबाकर इसका पानी निकाल लें.
-
इसके बाद पोटली को 30 मिनट के लिए लटका कर रख दें ताकि इसका सारा पानी निथर जाए. बीच-बीच में इसका पानी निचोड़ते जाएं.
-
इसके बाद एक कड़ाही या बर्तन में चीनी और पानी डालकर धीमी आंच पर रखें.
-
अब छेने को प्लेट पर रखें और 5-6 मिनट तक अच्छी तरह मसलते हुए छेने को गूंदें. सॉफ्ट रसगुल्ले बनाने के लिए इस स्टेप को बहुत अच्छी तरह फॉलो करें.
-
छेना मसलते-मसलते इसमें चिकनाहट आ जाएगी. इस स्टेप पर आप इसमें एक छोटा चम्मच कॉर्न फ्लोर मिला लें. फिर छेने को 2-3 मिनट तक अच्छी तरह मसलें.
-
एक लीटर दूध से बने छेने से 10 रसगुल्ले बनाए जा सकते हैं.
-
तैयार छेने से 10 बराबर लोइयां तोड़ लें.
-
एक भाग लेकर गोल-गोल करते हुए बॉल बना लें. इसी तरह सभी बॉल्स बना लें.
-
चाशनी की आंच तेज कर दें ताकि इसमें अच्छी तरह उबाल आ जाए.
-
उबालने आने पर इसमें एक-एक करके छेने की बॉल्स डाल दें.
-
सारे रसगुल्ले डालने के बाद कड़ाही या बर्तन को ढककर 15 मिनट तक तेज आंच पर ही रसगुल्लों को उबालना है.
-
अगर चाशनी की आंच कम रखेंगे तो इसमें रसगुल्ले सख्त हो जाएंगे.
- 15
मिनट बाद चाशनी में एक चम्मच केवड़ा जल डाल लें. इससे रसगुल्ले में अच्छी सी खुशबू आएगी.
-
आंच बंद करने के बाद 20 मिनट तक बर्तन या कड़ाही को ढककर रख दें.
-
इसके बाद आप पाएंगे की रसगुल्ले एकदम रुई जैसे सॉफ्ट और स्पंजी बनेंगे.

साभार-पकवानगली 
प्रस्तुति-अर्चना शर्मा