नमस्कार,
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम-आप बहुत कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ते जाते हैं. हम अपने समाज में हो रहे सामजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक बदलावों से या तो अनजान रहते हैं या जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश करते हैं. हमारी यह प्रवृत्ति हमारे परिवार, समाज और देश के लिए घातक साबित हो सकती है. अपने इस चिट्ठे (Blog) "समाज की बात - Samaj Ki Baat" में इन्हीं मुद्दों से सम्बंधित विषयों का संकलन करने का प्रयास मैंने किया है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत रहेगा...कृष्णधर शर्मा - 9479265757

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

मंगलवार, 29 जनवरी 2019

पढ़ते-पढ़ते : लिखते-लिखते, कवि की डायरी- जयप्रकाश मानस

 "एक श्रेष्ठ कविता बहु-संदर्भी होती है। यद्यपि कवि का संदर्भ सबका नहीं होता तथापि कविता में सबके संदर्भ हो सकते हैं। कई बार कविता में किसी एक पाठक, श्रोता, संपादक, अध्यापक, समीक्षक या आलोचक द्वारा तलाश किया गया संदर्भ अन्य दूसरे या सभी का संदर्भ नहीं होता। क्योंकि हर व्यक्ति के सोचने-विचारने, देखने-परखने का संदर्भ एक जैसा नहीं होता। फिर भी पाठक या श्रोता का अपना एक संदर्भ तो होता ही है। पाठक या श्रोता अपने उसी संदर्भ-संज्ञानता के बल पर कविता से अपना तादात्म्य स्थापित कर लेते हैं।" (पढ़ते-पढ़ते : लिखते-लिखते, कवि की डायरी- जयप्रकाश मानस)


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रविवार, 27 जनवरी 2019

बेसन की बर्फी (चक्की) बनाने की विधि – Besan ki Barfi Recipe in Hindi


आवश्यक सामग्री : Besan Barfi Ingredients

·         बेसन_Gram flour – 250 ग्राम,
·         शक्कर_Sugar – 250 ग्राम,
·         देशी घी_Pure Ghee – 200 ग्राम,
·         दूध_Milk – 02 बड़े चम्मच,
·         काजू_Cashew – 02 बड़े चम्मच (बारीक कतरे हुए),
·         बादाम_Almond – 02 बड़े चम्मच (बारीक कतरे हुए),
·         पिस्ता_Pistachios – 01 बड़ा चम्मच (लम्बे कटे हुए),
·         छोटी इलाइची_Green cardamom – 05 नग (छीलकर पीसी हुई)।

बेसन की बर्फी बनाने की विधि : How To Make Besan Ki Barfi

बेसन बर्फी रेसिपी इन हिंदी Besan ki Barfi Recipe in Hindi के लिये सबसे पहले एक बर्तन में बेसन लेकर उसमें दूध और दो बड़े चम्मच घी डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें।
अब कढ़ाई में देशी घी डालकर गरम करें। घी गर्म होने पर उसमें बेसन डालें और लगातार चलाते हुए अच्छी तरह से भून लें।
बेसन को एक प्लेट में निकाल कर रख दें। उसके बाद बर्तन में शक्कर और 1/2 कप पानी डालें और चलाते हुए पकाएं। जब शीरे में दो तार की चाशनी बनने लगेतो उसमें बेसन डाल दें और चलाते हुए पकाएं।
साथ ही इसमें इचाइची पाउडरबादाम और काजू भी डाल दें। जब बेसन का मिश्रण जमने वाली स्थिति में पहुंच जाए उसे गैस से उतार लें।
अब बेसन की चक्की जमाने की बारी है। इसके लिए एक समतल थाली में थोड़ा घी डालकर उसकी सतह चिकनी कर लें। इसके बाद बेसन का मिश्रण थाली में कलछी की सहायता से बराबर फैला दें।
बर्फी के ऊपर कतरे हुए पिस्ता डाल दें और चम्मच की सहायता से बर्फी की सतह को बराबर कर दें औ घंटे के लिए रख दें।
लीजिएबेसन की बर्फी बनाने की विधि कम्‍प्‍लीट हुई। बस 2 घंटे बाद बेसन बर्फी Besan Barfi एक तेज चाकू से मनचाहे शेप में काट लें और परोसें। इसे आप एयर टाइट बर्तन में रख कर 15-20 दिनों तक उपयोग कर सकते हैं।

नोट-
·         बेसन की बर्फी बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि अगर बर्फी घंटे के बाद भी जम नहीं रही हैतो उसे कढ़ाई में फिर से 2-3 मिनट भून लें और जमा दें।
·         अगर आपकी बर्फी जमने के बाद बेहद सख्त हो जाएतो उसे छोटे- छोटे पीस में तोड़ लें और उसमें 1/2 कप दूध मिलाकर फिर से पकाएं और मिश्रण एकसार होने पर पुन: जमा लें।

प्रस्तुति- अर्चना शर्मा (Archana Sharma)




रसीले गुलाब जामुन


मावामिल्क पाउडर या रेडी मिक्स से गुलाब जामुन तो बनते ही हैं. 
हम बता रहे हैं रवा और दूध से गुलाब बनाने का तरीका. रेसिपी आसान है और गुलाब जामुन का स्वाद भी उम्दा होता है.

कितने लोगों के लिए : 4 - 6
समय : 30 मिनट से 1 घंटा
मील टाइप : वेज

सामग्री 
टीस्पून घी
कप सूजी\रवा
1 1/2 
कप दूध
कप पानी
कप शक्कर

विधि 
सबसे पहले मीडियम आंच पर कड़ाही रखें.
इसमें घी डालकर गर्म करें.
घी के गर्म होते ही इसमें बारीक वाली सूजी डालकर 2-3 मिनट तक चलाते हुए भूनना है.
सूजी अच्छी तरह भूनने के बाद इसमें एक कप दूध डालें. फिर आधा चम्मच शक्कर डालकर मिलाते हुए पकाएं.
दूध सूखने के बाद आधा कप और दूध डालें. इस बात का ध्यान रखें कि सूजी की गुठलियां न बनें. इसलिए इसे अच्छी तरह चलाते हुए मिलाएं.
इसे तब तक पकाएं जबतक दूध सूख नहीं जाता है और सूजी का बढिया आटा नहीं बन जाता.
आंच से उतारकर इस आटे को ठंडा कर लें.
ठंडा होने के बाद आटे या मिश्रण को एक प्लेट पर निकाल लें और अच्छी तरह गूंद लें.
गूंदने से पहले हथेलियों पर थोड़ा-सा घी लगा लें. और मिश्रण को 8-10 मिनट तक गूंदें.
बढ़िया मुलायम आटा तैयार होने के बाद हथेलियों पर फिर से घी लगा लें और आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें. अगर लोइयों में क्रैक आ रहा है तो फिर से आटे को गूंद लें.
पुरे आटे से 16-18 लोइयां बन जाएंगी.
अब कड़ाही में घी डालकर गर्म करें. आंच धीमी रखें और घी में एक-एक करके 10-12 लोइयां डालकर फ्राई करें.
लोइयां पकने में 7-8 मिनट का समय लगेगा. जब गोल्डन ब्राउन हो जाएं तो घी से निकाल लें.
जब तक गुलाब जामुन फ्राई हो रहे हैं तब एक दूसरे बर्तन में एक पानी और एक शक्कर डालकर आंच पर रखें.
जब शक्कर अच्छी तरह घुल जाए तब आंच बंद कर दें.
इतनी देर में गुलाब जामुन भी पक जाएंगे.

इसी तरीके से बाकी लोइयों को फ्राई कर लें.
इन पकी लोइयों या गुलाब जामुन को चाशनी में डालें और आंच पर रखकर एक उबाल लगा लें.
आंच से उतारकर गुलाब जामुन को 1-2 घंटे तक चाशनी में डूबे रहने दें.
इसके बाद निकालकर मजे से रवा वाले गुलाब जामुन का स्वाद लें.
साभार-पकवानगली 
प्रस्तुति-अर्चना शर्मा 




शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

गीता माता-मोहनदास करमचंद गांधी

 तब भगवान ने उत्तर दिया- "हे पापरहित अर्जुन! आरंभ से ही इस जगत में दो मार्ग चलते आए हैं : एक में ज्ञान की प्रधानता है और दूसरे में कर्म की। पर तू स्वयं देख ले कि कर्म के बिना मनुष्य अकर्मी नहीं हो सकता, बिना कर्म के ज्ञान आता ही नहीं। सब छोड़कर बैठ जानेवाला मनुष्य सिद्ध पुरुष नहीं कहला सकता।" (गीता माता-मोहनदास करमचंद गांधी)




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सोमवार, 24 दिसंबर 2018

योद्धा संन्यासी विवेकानन्द- हंसराज रहबर

 "अध्ययन का उद्देश्य सत्य की खोज था और नरेंद्र जिसे सत्य समझ लेता था, उसकी जी-जान से रक्षा करता था। जब देखता था कि कोई दूसरा उसके विपरीत भाव या मत व्यक्त कर रहा है तो नरेंद्र चट विवाद पर उतर आता था और अपने सशक्त तर्कों और युक्तियों द्वारा उसे परास्त करके दम लेता था। पराजित व्यक्ति के बार बिलबिला उठते थे और नरेंद्र पर दम्भी होने का आरोप लगाने में भी संकोच नहीं करते थे। पर नरेंद्र के मन में किसी के प्रति द्वेष भाव नहीं था। और अपनी ही बात को ऊंचा रखने के लिए वह कभी कुतर्क का सहारा नहीं लेता था। उसे जो कहना होता था दूसरे के सामने साफ-साफ कहता था।" (योद्धा संन्यासी विवेकानन्द- हंसराज रहबर)




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शुक्रवार, 21 दिसंबर 2018

बड़ी दीदी-शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

 "इस धरती पर एक विशेष प्रकार के प्राणी हैं, जो मानो फूस की आग हैं। वे तत्काल जल उठते हैं और झटपट बुझ भी जाते हैं। उनके पीछे हमेशा एक आदमी रहना चाहिए, जो जरूरत के अनुसार उनके लिए फूस जुटा दिया करे।  जैसे गृहस्थ घरों की कन्याएं, मिट्टी के दीये जलाते समय उनमें तेल और बाती डालती हैं, उसी तरह वे उसमें एक सलाई भी रख देती हैं। जब दीपक की लौ कुछ कम होने लगती है, तब उस छोटी-सी सलाई की बहुत आवश्यकता पड़ती है। यदि वह न हो, तो तेल और बाती होते हुए भी, दीपक का जलना नहीं हो सकता।" (बड़ी दीदी-शरतचंद्र चट्टोपाध्याय)




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मंगलवार, 18 दिसंबर 2018

स्वेटर, कहानी संग्रह-अशोक जमनानी

 पिछले कुछ महीनों के सारे दुःख उसे अचानक याद आ गए। हर एक दुःख का सामना करते वक्त एक भरोसा उसके साथ रहा कि कभी न कभी ये समय बीत जायेगा और वो फिर से अपनी पुरानी ज़िन्दगी पा लेगा। लेकिन आज न जाने क्यों उसके अपने  पाँव ही उसका साथ नहीं दे रहे थे। मज़दूरी करते वक्त छह दिन वो इसी उम्मीद में काटता था कि शनिवार की रात से सोमवार सुबह तक वो अपने घर में अपनी मर्ज़ी का मालिक रहेगा। यह एक उम्मीद ही उसके भीतर दूसरी हर एक उम्मीद को जन्म देती थी। (स्वेटर, कहानी संग्रह-अशोक जमनानी)



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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

आँगन में एक वृक्ष- दुष्यन्त कुमार

 "मुंशीजी ने कभी किसी से कड़वी बात नहीं कही, कभी किसी पर गुस्सा नहीं किया और कभी किसी को नाराज नहीं किया। हालाँकि कई  बार मुंशीजी ने पिताजी के लिए काश्तकारों की जमीनें हड़पी, उन्हें बेदखल कराया या किसी पर सौ के बदले हजार रुपये की नालिश ठोक दी, मगर मीठे वे फिर भी बने रहे। अनेक ऐसे मौके भी आये जब मुंशीजी को उन लोगों की गालियाँ, धमकियाँ और जूते तक बरदाश्त करने पड़े। एक बार तो अपने भिक्खन चमार ने ही उन्हें स्टेशन से आते हुए, रास्ते में, मुंगड़पुर गाँव के ठीक बीचोंबीच पकड़कर दस जूते मारे थे" (आँगन में एक वृक्ष- दुष्यन्त कुमार)



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गुरुवार, 6 दिसंबर 2018

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए

 

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,

हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,

मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए

 

दुष्यंत कुमार

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बुधवार, 5 दिसंबर 2018

हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़-विनोद कुमार शुक्ल

 "अपने सबके अन्दर चाहे कोई कितना भी छोटा हो पर सबकी गहराई अन्दर की गहरी है- खुद अपने अन्दर भी गिरते पड़ते रहते हैं एक और संसार अपनी गहराई में चाहे उल्टा बसा हो बाहर के संसार से कभी वहीं रहे आने का मन करता है रह लेना चाहिए। (हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़-विनोद कुमार शुक्ल)




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